अपने गर्भ में पल रही संतान को भी बनाये विद्या और गुणों का सागर सुनिए प्रेरक महापुरुष जीवन प्रसंग ईश्वरचद विद्या सागर जी का जीवन परिचय माना जाता है कि गर्भावस्था में माँ जैसा सोचती है, सुनती है वैसे ही शिशु में संस्कार आने लगते है इसलिए महापुरुष जीवन प्रसंग के बारे में शिशु से गर्भ संवाद करें। संवाद से वैसे ही गर्भ संस्कार मिलेंगे और शिशु गर्भ में ही तेज बुद्धि वाला शुभ संस्कारी बनेगा